अमूल्य प्रकाश स्रोत :कोहिनूर हिरा :भाग एक


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अमूल्य प्रकाश स्रोत :कोहिनूर हिरा :
भाग एक:
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         ।।शिव संकल्पमस्तु।।
कोहिनूर हिरा  कोह-ए-नूर वा कोहिनूर आणि कोह-ए-नूर हा जगातील सर्वात मोठा कट हिरा आहे, ज्याचे वजन 105.6 कॅरेट आहे. Uncut 796 कॅरेट असून oval shaped आहे .हा ब्रिटीश क्राउन आज शोभा वाढवतोय  कारण एलिझाबेथ 2 इजकडे तिची मालकी आहे ,व कोल्लूर खाणीत तो मिळाला असा उल्लेख आढळतो .
मूळ भारतीय स्रोतांच्या दोन अनमोल अमूल्य व अलौकिक वस्तू आज ब्रिटन मध्ये गहाण पडल्यात ,त्या म्हणजे आई भवानीने महाराजाना दिलेली अजिंक्य भवानी तलवार व अलौकिक कोहिनूर ? हिरा.या दोन वस्तू नुसत्या अमूल्य  ,नाहीत तर अलौकिक आहेत ,नुसत्या अमूल्य व अलौकिक नाहीत तर दैवी आहेत ,हो दैवी आहेत हे भवानी तलवारी बाबत लगेच पटेल कारण हे सर्व श्रुतच आहे,निदान आपल्या येथे  तरी .पण कोहिनूर? हाही दैवी हिरा आहे ते आपण पुढे पाहूच फक्त तलवार अजिंक्य पण हिरा ...........?
कोहिनूर?हिऱ्याची आजच बाजारमूल्य 175 हजार करोड रुपये आहे .तो जर विकला तर सारे जगाच पोषण 7 वर्ष होईल .हे लक्षांत घेतलं तरी कोहिनूर? किती अमूल्य आहे हे  समजून येईल.
आजकाल तो परत भारतात आणण्याच्या हालचाली सुरू आहेत .
मूळ भारतीय असलेल्या किथ वाज या ब्रिटिश सांसदाने हि विनंती ब्रिटिश पंतप्रधान डेविड कामरून  यांना केली व भारतीय पंत प्रधानांच्या ब्रिटन दोऱ्या दरम्यान ती भारतात परत द्यावी .या विनंती मुळे कोहिनूर भारतात परत यावा हि चर्चा सुरु आहे .
या कोहिनूर हिरया 1294 नंतर  प्रकाश झोतात आला . याचा पहिला उल्लेख बाबर नामा मध्ये येतो असे म्हणतात त्या नुसार हा 1294 ला ग्वाल्हेर येथील एका अनाम राजा कडे होता असे बाबर नामा म्हणतो. 1200 ते 1300 दरम्यान हा गुलाम साम्राज्य,खिलजी साम्राज्य व लोदी साम्राज्याची शोभा होता.पण तेव्हा तो कोहिनूर या नावाने ओळखला जात नव्हता . व जग प्रसिद्ध हि नव्हतो व अनमोल म्हणूनही मान्यता प्राप्त नव्हता.इ.स.1306 पासून तो कोहिनूर म्हणून नाव रुपास आला.
1326 ला हा काकतीय वंशकडे गेला ,व, मग मोहंमद तुघलककडे ,Gतेथून तो शाहजहान कडे गेला व त्या च्या सिंहासनाच्या मढवला गेला व त्याच्या मयूर सिंहासनाची शोभा वाढवता झाला ,व त्याच्या कडून त्याचा क्रूरपुत्र औरंगझेब कडे गेला.
पण 1625 साली त्याला जगातील सर्वोत्तम अनमोल हिरा म्हणू मान्यता पावला. हि मान्यता त्यास एका फ्रांससी
यात्री,जो जोहरी हि होता,यांनी दिली.
1739 साली फारसी राजा नादिरशाह याने भारतावर आक्रमण करून हा कोहिनूर?ताब्यात घेतला ,अशा रीतीने तो मुघलांकडून स्वतंत्र झाला .1747 ला नादिरशाह नंतर तो त्याच्या वारसाकडे गेला.
पण इथेही तो टिकला नाही व मग पंजाबच्या राजा रणजित सिंहकडे गेला.पण त्यांच्या मृत्यूपश्चात तो त्यांच्या वारसांकडे राहिला नाही.
असं म्हणतात की राजा १७४९ म् मध्ये शीख युद्धाच्या मदतीचा पुरस्कार म्हणून महाराजा रणजितसिंगच्या उत्तराधिकारींनी ईस्ट इंडिया कंपनीला  बक्षीस म्हणून दिलासा ,ब्रिटिशांनी जबरदस्तीने घेतला क किंवा चोरी केली असे म्हटले जाऊ शकत नाही.

1877 साली तो ब्रिटिश साम्राज्याच्या हाती गेला व जाणीव पूर्वक ,किंग जॉर्जराजने तो स्वतःकडे न ठेवता राणीच्या मुकुटाची शान बनवला. व आजही तो 2021 पर्यंत तिथेच आहे .
पण मग काही प्रश्न उदभवतात ;
: कि किंग जोर्ज ने स्वतः न वापरता हा हिरा राणीकडे का दिला?
हिरा अनेक ठिकाणी फिरत फिरत का गेला ,
हिरा खर्च 1294 ला प्रकाश झोतात आला का?  ,त्याच खरं नाव कोहिनूर च आहे का.?
या आधी कुठे कुठे होता हा हिराहिरो? काय नाव होत याच ,कुणा अवताराकडे  तो होता कां ?  आपल्या किर्त्येंकास  तो माहित आहे पण तोच कोहिनूर हे कनेक्ट हो नाही .काय आहे हे सर्व  चला तर पाहुयात .थोडक्यात सांगायचे तर 15 एक वर्षांपूर्वी आपण कित्येकांनी ब्योमकेश  बक्षीची गुप्त हेर कथा वाचली व TV वर पाहिली असेल जी शनीच्या नीलम या रातच्या चोरीची शेरलॉक होम टाइप  शोध कथा आहे तशीच काहीसं  गूढ सत्य  या सो called कोहिनूर  हिऱ्याशी संबंधित आहे .चला तर जाऊयात या गूढ राहस्यचा वेध घेऊ.
इदं न मम।
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अमूल्य प्रकाश पहाड: कोहिनूर ?हीरा:प्रथम भाग
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         ।।शिव संकल्पमस्तु।।

कोहिनूर हीरा कोहिनूर या कोहिनूर और कोहिनूर दुनिया का सबसे बड़ा कटा हुआ हीरा है, जिसका वजन 105.6 कैरेट है।  बिना काटे 796 कैरेट और अंडाकार आकार। यह ब्रिटिश ताज में आज सुशोभित है क्योंकि यह एलिजाबेथ द्वितीय के स्वामित्व में है, और यह उल्लेख किया गया है कि यह कोल्लूर खदान में पाया गया था।
मूल भारतीय मूल की दो अमूल्य और अलौकिक वस्तुएँ आज ब्रिटेन में गिरवी पडी हैं, अर्थात् शिवाजीमहाराज कि माँ भवानी द्वारा दी गई अजिंक्य भवानी तलवार और अलौकिक कोहिनूर?  हीरे ये दो वस्तुएं बस अमूल्य हैं, अगर अलौकिक नहीं हैं, न केवल अमूल्य और अलौकिक हैं, बल्कि दिव्य हैं, हाँ, वे दिव्य हैं।  यह एक दिव्य हीरा है, हम बाद में देखेंगे, केवल तलवार अजेय है लेकिन  कोहिनूर हीरा ………?
कोहिनूर हीरे का बाजार मूल्य 175 हजार करोड़ रुपये है। अगर इसे बेचा जाता है, तो 7 साल तक पूरी दुनिया का पोषण हो सके हैं।  समझें  यह कितना मूल्यवान है।
उसे भारत वापस लाने के लिए   चर्चा आंदोलन चल रहे हैं।
भारतीय मूल के ब्रिटिश सांसद कीथ वाज़ ने ब्रिटिश प्रधान मंत्री डेविड कैमरन से भारतीय प्रधान मंत्री की ब्रिटेन यात्रा के दौरान इसे भारत वापस करने का अनुरोध किया।
यह कोहिनूर हीरा 1294 के बाद सामने आया।  कहते है इसका पहला? उल्लेख बाबरनामा में मिलता है, जिसके बारे में कहा जाता है कि यह 1294 में ग्वालियर के एक अनाम राजा द्वारा किया गया था।  1200 और 1300 के बीच यह गुलाम साम्राज्य, खिलजी साम्राज्य और लोदी साम्राज्य का अलंकरण था लेकिन उस समय इसे कोहिनूर के नाम से नहीं जाना जाता था।  और दुनिया प्रसिद्ध नहीं था। और कीमती के रूप में मान्यता प्राप्त नहीं थी।
१३२६ में वह काकतीय वंश में चला गया, और फिर मोहम्मद तुगलक के पास, वहाँ से वह शाहजहाँ के पास गया और उसने उसे अपने ताज मी सजोया और उसका म्युर सिंहासन इसी से सुशोभित किया गया, और उससे अपने क्रूर पुत्र औरंगजेब के पास गया।
लेकिन 1625 में इसे दुनिया का सबसे कीमती हीरा माना गया।  यह मान्यता एक फ्रेंच यात्री, जो एक जौहरी भी था, ने दे दि।
1739 में, फारसी राजा नादिर शाह ने भारत पर आक्रमण किया और कोहिनूर पर कब्जा कर लिया, इस प्रकार इसे मुगलों से मुक्त कर दिया।1747 में, नादिर शाह कि मृत्यूपश्चात  वोह हिरा उत्तराधिकारीके पास  गया।
हालाँकि, वह यहाँ भी नहीं टिक पाया और फिर पंजाब के राजा रणजीत सिंह के पास गया, लेकिन उसकी मृत्यु के बाद, वह उनके उत्तराधिकारियों के साथ नहीं रहा।  और  वाहसे यह हिरा 1887 में ब्रिटन पहुच गया और यह अभी भी 2021 तक   है।कहते है कोहिनूर को जबरन लिया हुआ या चुराया हुआ नहीं कहा जा सकता क्योंकि वर्ष 1849 में महाराजा रंजीत सिंह के उत्तराधिकारियों ने सिख युद्ध में उनकी मदद के लिए ईस्ट इंडिया कंपनी को इनाम के तौर पर दिया था।
राजा जॉर्ज ने यह हिरा जानबुझ के खुद न इस्तमाल कर  राणी व्हिक्टोरिया कि ताज का भाग बना दिया ।
लेकिन फिर कुछ सवाल उठते हैं;
: किंग जॉर्ज ने यह हीरा बिना खुद इस्तेमाल किए रानी को क्यों दिया?
हीरा इतनी जगह क्यों घूमा,
क्या हीरों की कीमत 1294 में सामने आई थी?  क्या वही असली नाम कोहिनूर है?
यह हिराहिरो पहले कहाँ था?  अवतार का नाम क्या है?  आपके बहुतसारे लोग इसे जानते हैं, लेकिन यह कोहिनूर से कनेक्ट नहीं कर पाते है।
आइए देखें कि यह क्या है। संक्षेप में, 15 साल पहले, आप में से कई लोगों ने ब्योमकेश बख्शी  गुप्त जासूस की कहानी पढ़ी होगी और इसे टीवी पर देखा होगा नीलम रत्न चोरी का  शोध लेती है  इस तथाकथित कोहिनूर हीरे से कुछ ऐसीही रहस्यमयी सच्चाई जुड़ी हुई है आइए देखते हैं इस रहस्यमयी रहस्य को।
इदं न मम।
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